देखैत जयबनि...

बाट मे जा रहल हुनको कनिक देखैत जयबनि । अपने लोक बाट मे जनिका छोड़ि क' चलि गेलनि। 

कतहु बैसल ने होइथ थाकि क' कोनो गाछ तर ।बिलमि क' एकरती हुनको बगलमे बैसि रहबनि।                              🌳!🌳

                    गंगेश गुंजन

                #उचितवक्ताडेस्क।

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