प्रिय मित्र रवीन्द्र जी,पिलखवाड़कें ध्यानार्थ:
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भोरे उठि क' आंगन* सं दलान° पर अयलौं। एही रूपें अपन बर्ख हम आइ बदलि लेलौं।
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आंगन* माने-सूतैवला कोठली।
दलान° माने-ड्राइंगरूम। 😃।
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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