लोक कवि

! 🙄 !            लोक कवि !                 
     तेहनो कवि छथि जे जाही तन्मयता सँ
     कविता लीखैत छथि ताही मनोयोग सँ
     दालि मे देबा लय मुनिगा सोहै छथि।
         समाजक लोक कवि के अनेरे अलोक
     कहैत आबि रहल छथि।
                    गंगेश गुंजन
                #उचितवक्ताडेस्क।

टिप्पणियाँ