|| ग़ज़लसन। ||
सहल जाएत नहिं एतेक दु:ख
कहल जाएत नहिं ई सब दु:ख।
सुख मे सेहो गुलामी छैक
हो न जेना दु:खे सब दु:ख।
सुख सब हक छै अलगे अलगे
मुदा एक छैक सबहक दु:ख।
सब वियोग नहि हो एक रंग
हो न तकर एक रंगक दु:ख।
ओकरा अपन कोरोनाक छै
हमरा सुइ घटि जयबाक दु:ख।
ओकरा राज्य सभक भोटक
एकर संहिता पालनक दु:ख।
दोस्त महिमक छनि किछु आने
गंगेशोक अलगे छनि दु:ख।
* गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
१४.०४.'२१.
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