अतः हमर सुभिमान छल ....

 🌺 ।              ग़ज़लसन।              । 🌺
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      जे जहाँ छल स'भ किछु सुनसान छल
      हम रही एकसर हमर दलान छल।

      भोर छल मन्हुआयल आ नि:शब्द
      बौक दुपहर, सांँझ सब सुनसान छल।

      गीड़ि लेलक सऽभ टा कंक्रीट बाट
      मित्र पयरक,टहलबाक निशान छल।

      ई विकास त ओ विकास की विकास
      गाम जीवन-मूल्य तंँ शमशान छल।

      मित्र किछु पढ़लनि अतीतक गीत ई
      हुनक सोचक यैह तँ अनुमान छल।

     हम यद्यपि नहिं कहल मिथिलाक सब
      रीत नीत व्यवहार सभ महान् छल।

      जे रहय से सत्य भरि संसार गेल
      नक़ल नहि हँ ज्ञान वैभव-दान छल।

      दुमहला पक्का पिटल धनिकक घर
      खऽढ़-बाँसक घरक सभ अपमान छल।

      भनहि लागओ हमर ई नॉस्टेल्जिया
      क्लेश उपटल पोखरिक मखान छल।

      नहि कहब जे कत' हम्मर कान छल
      नहिं कहब जे कत' हम्मर ध्यान छल।

      अपन बड़ कम लोक आने आन छल।
      की कहू कत्तऽ हमर सुभिमान छल।
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                    गंगेश गुंजन
                  ०७ मार्च,'२१.

              #उचितवक्ताडेस्क।

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