आत्मा मई 12, 2021 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप जर्जर देह पसिन्न नहिं एकरा सदा तकैए नवका घर। सूखल डारि छोड़ि कऽ नऽव कुसुम दिसि ऊड़य ई मधुकर। गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। टिप्पणियाँ
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