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।। शास्त्र कें साहित्य सँ अशौच जेना ।।
शास्त्र कें साहित्य सँ जेना अशौच लगैत
होइक। नेनहि सँ हम एहनाहे जकाँ अनुभव
करैत देखैत आबि रहल छी। अन्यथा,शास्त्र
सेहो मिथिला मे एना बिलायल नहिं चलि
गेल रहइत।
से आब ऐ बयस मे सोचाइए।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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