🌿🌿
दलान-नाट्य
☘️|☘️
।। सोहर : जीवन गीत ।।
दृश्य : [गामक कोनो दलान वा शहरकड्राइंगरूम।
घराउ पहिरन-ओढ़न मे गप्प करैत बुझाइत
तीन टा समबयसी प्रौढ़ लोक। कोनो अऽढ़
मे स्त्रीगण जकाँ एक युवक कोन्टा लऽ
कान पथने सुनैत। अकस्मात ओसोझाँआबि
बतियाइत तीनू गोटय दिसि इशारा करैत
बिहुँसैत कहऽ लगैत अछि:]
सूत्रधार : ( स्वगत) हिनका लोकनि कें अओर
आनो कतोक पुरना लोक कें लगैत छनि
जे स्त्रीगण लोकनि सोहरक भास अनेरे
बिसरि जाइ गेलीहय। संगहि बुढ़ा लोकनि
कें इहो सोचाय छनि जे समाज मे सोहर
गाएब बिसरि जाएब,एखन एहि कोरोना
कालक विपत्ति मे एकटा आओर पैघ
पराभव थीक। गबैत तँ रहथि स्त्रीगणें
लोकनि। आइयो आधुनिका सँ आधुनिका
लोकनि आखिर कोनो ने कोनो गीत
तँ गबितहिं छथि। फिल्मीएं सही। सोहरो
सीखथु।
दोसर जे,ख़ामखा एहि विषय मे स्त्री-मनक
उदासीन रुचि वा कोनो एहन परिस्थिति के
गंभीर मानैत छी आ सोहरक महत्त्व केबुझैत
छी तँआब पुरुषे लोकनि सोहर किएक ने
गाबय लागथु ?
एक मित्रक ई प्रस्ताव ओतहि बैसल दोसर
मित्र कें बड़ पसिन्न पड़ि गेलनि। ओ अपन
विचार दैत कहि रहल छथिन :
दोसर मित्र: '... मुदा समस्या ई जे नेनाक जन्मे तंँ
आब गाम घर मे नहिंयें जकाँ भ' रहलए।
सोइरी घर तँ शहरक छोट-पैघ अस्पताल
नर्सिंग होम सभ मे भ' रहल छैक। तंँ नर्सिंग
होम प्रबंधनक आपत्ति संगहि ओतेक स्त्री
गण जुटाएब व्यवहार रूप संँ संभव सेहो
नहिं रहि गेलय। तंँ सोहर हो कोना आ
कतऽ? उपायो तँ नहिं छैक।…. मुदा ऐ
विशेष विषय पर बात-विचार आ मंथन
अबस्स होएबाक चाही।'
सूत्रधार। : ( वार्ता मे कनी र'स लैत बिहुँसैत,
एक दिसि संकेत करैत):
' ...तेसर मित्र एतेक काल बुच्ची दाय चुप्प
रहथिन। चुप किएक छलाह से बुझबा मे
हमरो,आब आयलय। सुनै जाउ। ओ
अपन विचार-विस्फोट कय रहल छथि :
तेसर मित्र : औ सोहर गयबा लेल तँ सोहरक
अवसरो उपलक्ष्य चाही ने। एक तंँ आइ
काल्हि नेना जनमियें कम्मे रहल छथि।
तकर कारण जे हो।कय प्रकारक इंतजाम
सँ वा नव पीढ़ी बेसी पुरुख-स्त्रीक बच्चा
लय उत्कंठो नहिं। बल्कि उदासीनते
कारण आ ताइ दिन जकाँ तँ बात नै जे
माय-बाबू कें पोती-पोताक मनोरथ पूर्ण
करब कर्तव्य थीक सेहो भाव तँ बेटा पुतहु
मे नहियें जकाँ बाँचल छैक।
(विचारक जकाँ एक पल चुप सोचैक मुद्रा:)
एखनो विवाह ने तथापि दनादन भ' रहलय,
नेना नहिं ने दनादन जनमि रहलय !
तखन ?'
दोसर मित्र : तँ एकर समाधान की हो? की
उपाय ?
तेसर मित्र : सोझ उपाय। सोहरक एहने सऽख
अछि तंँ नेना जन्महुक भार पुरुष
गण आब अपने किएक ने उठा लै
जाथु ?
एक छुट्टी। एहन परिस्थिति मे हमरा
यैह एक टा उपाय देखा रहलय बाबू।
विशेष जे ई इंतिजाम अपने हाथ में। ऐ
व्यवस्था लय ने बी डी ओ कें कऽल
जोड़ऽ पड़त ने क्षेत्रक एम एल ए-एम
पी साहेबक दरबार जे सरकार लग
पैरवी क' देथि जे कोनो सरकारी
विधान क' दिअओ। कहबिओ छैक-
अपने हाथ जगरनाथ !
( एतबा सुनितहिं पहिल दुनू मित्रक घार
लटकि जाइत छनि।)
सूत्रधार : कनखी जकाँ मारैत मजा लैत व्यंग्यक
टोन मे ) :
-एकर कोनो जवाब ?
[ पृष्ठभूमि मे कोनो फि़ल्मी सोहर गाना
बजबाक ध्वनि उठैए ]
🌺🌿🌺
नाटककार विभूति आनन्दक प्रति।
!🌸!
#उचितवक्ताडेस्क।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें