। माय ।
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भगवान् कें मनुष्य बनबैत नहिं देखलिअनि
कहियो।
माय कें भगवान् बनबैत देखने छिअनि।
भगवान् केँ कहियो भानसो करैत
नहिं देखलिअनि।
हंँ,कयल-धयल पर सिरी जगरनाथ होइत
अबस्से सुनैत आबि रहल छिअनि।
माय कें चिकनी माटि सँं महादेव बनबैत संँ
ल' क' कड़ाचूर दुपहरियाक रौद में
आँगनक अन्नक पथार लाड़ैत-सुखबैत
देखलिअनि।
स्कुलिया ताहरी मे भानस करैत,
आँच संँ कय काल हाथ झरकबैत
देखलिअनि।
स्कूल सँ घूरै मे एक रती देरी पर व्याकुल भ'
पूछैत देखने छिअनि-आइ बड़ देरी भ' गेल'
मधुबन्नी सँ घुरबा मे ?'
'आँखि जेना एक रती चढ़ल बुझाइ छ' तोहर।
ज'र तँने छ'? पूछैत कपार स्पर्श करैत
देखलिअनि।
भगवान् के तँ बेसी काल माइये मुँहें सुनने
छिअनि। ! 🌺 !
#उचितवक्ताडेस्क।
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