कोरोना काल मे उक्कस पाकस

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   उक्कस-पाकस: कोरोना काल मे
                    🌓
   सामान्य लोकक आस्था मे जेना
   ईश्वर रहैत छथि तहिना 
   लोकतांत्रिक राजव्यवस्था मे
   सरकार कें बुझू।अर्थात जेहन
   आभासी ईश्वर तेहने सरकार।
       जीवनक सब निर्माण-विनाश
   होइत रहैत छैक स्रैष्टिक प्रक्रिया
   मे स्वत: किन्तु जन साधारण
   लोक तकरा दैविक कृपा बुझैत
   रहैये। तहिना सब टा रोगाह- 
   स्वस्थ्य योजना सरकारी
   नियमानुसारे होइत रहैत छैक
   परन्तु जनता कें आभास होइत
   छैक जे मुख्यमंत्री आ प्रधानमंत्री
   क' रहल छथि। यैह लोकनि
   कयलनिहें।
   लोक कें भंग मनोरथ ईश्वरो करैत
   छथि आ सरकारो। ईश्वर
   जवाबदेही नहिं लैत छथि। हुनका
   कहचरीक कठघरो मे ठाढ़ नहिं
   कयल जा सकैए। मुदा सरकार
   केँ तंँ हँ। भने अपूर्णे पंचमे वर्षे ।
      तखन एहि दुनू आभासी सत्ता
   मे हमरा तँ लोकतांत्रिके पसिन्न
   अछि। कारण जे राज्य कि केन्द्र
   मे ई एक ठाम सुस्थापित आ
   केन्द्रित तँ देखाइत अछि।  
   विधानसभा हो लोकसभा हो।
  ओहि मे बैसल लोक पर अनुरोध
  तँ क' सकैत छी। भगवानक तंँ
भरि देश लाखो मन्दिर मस्जिद बनल पसरल अछि। ओइ अनन्त घर मे पूजा इबादत करैत फिरू। अपने कहू जे कोनहुँ साधारण ग़रीब लोक वास्ते ई संभव छैक ? ओना तँ सक्षम संपन्न लोकहु वास्ते नहिं।खैर,
     सुनै छी जे कौरव राजसभा मे 
  द्रौपदीक चीर हरण भ' रहनि। 
  आब जे घड़ी ने सौंसे साड़ी देह सँ
  उतरि जाइन।ओ बेचारो
  'हा कृष्ण हा कृष्ण' चीत्कार क' रहलीहय आ श्रीकृष्ण इन्द्रप्रस्थ सँ द्वारिका जा रहल छथि। की तँ ओत' जा कऽ ओतहि सँ औताह ! एहन विकट समय पर पहुँचबा मे
कृष्णक असहनीय विलम्ब पर जखन कनैत द्रौपदी आर्त्त भ' अनुरोध कयलथिन तँ श्रीकृष्ण अपन लाचारी बुझौलथिन जे आखिर हमरा द्वारिकापुरी सँ एत' अयबा मे समय तंँ लागैत ने ?'
'हम एहन विपत्ति मे पड़लि आ सर्वत्र व्यापी अहाँ, द्वारिका की कर' गेलौं ?' द्रौपदी आश्वस्त होइतहुँ अनुरोध कयलथिन तँ कृष्ण जी अपन ईश्वरीय तकनीकी लाचारी कहलथिन। पढ़ल जाव:
'अहाँ तंँ हमरा 'हा कृष्ण द्वारिका बासी' कहि-कहि बजबैत रहलौं। सर्वत्र बासी कहि क' बजा रहल रही। जँ सर्वव्यापी कहि क' बजौने रहितहुँ तँ उचिते तत्क्षणे उपस्थित भ' जैतहुँ।'
   ठीके ई श्रीकृष्णक बहुत भारी ईश्वरीय तकनीकी त्रुटि होइतनि जँ ओ भक्तक आह्वानक अक्षरशः पालन नहिं करितथि तँ।
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                #उचितवक्ताडेस्क। 

                     गंगेश गुंजन।

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