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यात्री जी-बाबाक स्मरण !
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बात-बात पर ऊठय तामस बूढ़क
दोष
डेग डेग पर टोका टोकी बयसक
दोष।
बिना प्रयोजन काज अढ़ाएब इ
की बात
टेरब नहिं सुनि अन्ठाएब से
युवकक दोष।
विश्व शान्ति मे शक्ति प्रदर्शनक
कुटिचालि
रूस-चीन-अमरीका फ्रांँस कि
रूसक दोष।
आयल कत' सँ के अनलक वा
पठा देलक
पसरल भरि संसार बजार
करोनाक दोष।
साधारण जन सबठाँ पाकिस्ताने
नहिं
एत्तहु अछि तबाह विकसित सभ
देशक दोष।
सब पोखरि इनार चापाकल पड़ल
सुखायल
राजाक नहिं ई सब प्रजाक
पियासक दोष।
हमर गाम आनो कय टा किसान
संँ रिक्त
की हरियाणा-पंजाबक ट्रैक्टरक
दोष।
हऽर-बड़द खुर्पी कोदारि कचिया
हाँसुक
सकल काज क' लैछ आब
मिशीनक दोष
हाथ-पयर देहक श्रम नहिं पूजी
बऽले
कार्पोरेट किछु लाख लोक
किसानक दोष
दुनिया एमहर किछु दिन मे बड़
आगाँ गेल
कृषकहु मे उपजल नवका दू
वर्गक दोष।
आब किसानी कहाँ रहल जे अछि
नामहिं
गाम छोड़ि मज़दूर बनल सब
भूखक दोष।
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गंगेश गुंजन
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सादत पुर निवास पर।
साहित्य अकादेमी महत्तर सम्मान
के अवसर पर (फोटो में बायें से:
बाबा नागार्जुन जी,अनन्तकृष्ण
मूर्ति जी, प्रो इन्द्रनाथ चौधुरी जी
और गंगेश g.।
#उचितवक्ताडेस्क
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