स्त्री मन विडम्बना

                    🛖| 🦜
           स्त्री-मन विडम्बना !
    एहन बहुत रास स्त्री एखनहुँ
    जान-बेजान पूजा-पाठ,हफ़्ता मे
    कय कय दिन एकादशी-अनोना
    व्रत उपवास करैत तेहन
    प्रायश्चित्त करबा मे अपन जीवन
    होम क' दैत छथि जे पाप हुनका
    सँ कहियो भेलहि ने छनि।
        दोसर एहने व्रत-उपवासी स्त्री
     ओहि भगवानक सोझाँ मे भरि
     जीवन अपन देह आ मोन कें
     ताहि मनोरथ मे डाहैत रहैत
     छथि जे ईश्वर कहियो पूर्ण
     करितहिं नहिं छथिन।
    हम एहन कतोक स्त्री कें जनैत
    छिअनि जे आब संसार मे
    नहिंयों छथि।
               विडम्बना!
                      !🔥!
            #उचितवक्ताडेस्क।

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