नोर आ हँसब अंतरराष्ट्रीय भाषा थीक

मनुष्यक नोर आ हँसी अंतर्राष्ट्रीय भाषा थीक।
कारण एकर लिपि सृष्टि स्वयं रचने अछि मनुष्य नहिं।
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              गंगेश गुंजन

        #उचितवक्ताडेस्क।

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