..... हम उपजौलौं एतबा कविता

अपना खरिहानक सिल्ली सँ जुनि तौलू हम्मर दू पंँतिया।
सौंसे बाधक खेत जोति क हम उपजौलहुँ एतबा कविता।
                       🌦️
     गंगेश गुंजन  #उचितवक्ताडेस्क।

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