परथन जुलाई 23, 2021 लिंक पाएं Facebook X Pinterest ईमेल दूसरे ऐप परथन >> कविताक रोटी समाजक परथन बिना बेलल नहिं जा सकैए। रोटी आइयो पकिते अछि जेना विपत्ति सँ विपत्ति कालहु मे,नित्य जनमिते रहैत अछि मनुष्य। होइतहिं रहैत अछि सृष्टि। ** #उचितवक्ताडेस्क। गंगेश गुंजन टिप्पणियाँ
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