|| धीरोदात्त आलोचक || 🌀
आइ फेर मित्र समाधान प्रसाद
जी फोन पर अवतरित भेलाह
आ सोझे कहलनि,कहलनि की
ज'न जकांँ अढ़ौलनि-'मैथिलीक
दुइयो टा धीरोदात्त आलोचक
नाम कहू तंँ।' सुनि क' हम तँ
सकदम्मे भ' गेलौंहें।
काव्य-नायकक ई एक टा
प्रकार तँ पढ़ने छी,धीरोदात्त
आलोचको होइत छथि से तँ
प्रथमहिं अहीं मुँहें सुनि रहल छी।
ओना हमरा एकर यतबा अर्थ
लागलय ताहि हिसाबें दू कि पाँच
टा नाम गना सकैत छी।' हम
अपन मैथिली-स्वाभिमान मे
तत्काल कहि तँ देलिअनि मुदा
विषय बड़ संवेदनशील आ
जिम्मेदारी वला थिकै।तें सोचायल
जे समाजो संँ एकर राय मदति ल'
लेबाक चाही,तखने डेग आगाँ
उठाबी।
'धीर ललित,धीर प्रशान्त आ
धीरोद्धत आलोचक कें तंँ हम
अपने जनैत छिअनि।'अचानक
ई बुझबैत ओ अपन भाव केँ
विक्षाइयो देलनि।अर्थात् ई चारू
आलोचक-कोटि ओ विधिवत
निर्धारित क' चुकल छथि।
समाधान बाबू तेहन तेकठाह
स्नेही लोक छथि जे तखनहिं
सँ हमरा किछु ने फुरा रहलय।
प्रिय आदरणीय फेसबुक संगी लोकनि !
पाँचो टा मैथिलीक धीरोदात्त
आलोचकक नाम हमरा सुझा
क' एहन साहित्यिक विपत्ति में
यथायोग्य हमर मदति करै जाइ
से हमर विनती।
काल्हि दुपहरिया मे ओ फेर
पुछताह।
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#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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