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जीवन-धन !
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जै दिन जीवन धरती पर आयल
प्राते मे बजारो आयल।
कोनो न'व नहि।
मनुख-जीवनक संबंधो
किछु तेहने बजार।
ध’न सब दिन आदर आ
सम्मानक
विषय रहैत आयल ई।
ध'नक ऊपर मनुख रहल हैत
कहियो से
आब इतिहासहु मे ताकहि पड़त।
एखन अबस्से निकट बहुत
परसल जीवन मे वैह बात बजार
सुनवाइ हो जकर संबंध
बजार व्यापार लाभ-हानिक
हिसाब संँ हो ।
अहूँ की गुंजन जी
आतुरता मे आंँखि मूनि क’ दौड़ि
गेलौं
कीनि लेबाक शक्ति उपार्जित
करबाक दौड़ा-दौड़ी मे होब’
लगलौं शेयर बजार।
खबरदार औ ख ब र दा र !
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#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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