ग़ज़लसन नाचि क समय नटिन भ' गेल।

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              ग़ज़लसन        
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कोनहुँसंकल्प टीकब कठिन भ'गेल
केहन ईसमय लोकक दिन भ' गेल।

ओकर कंचनक काया चन्द्रमा सन
रौद मे मुख केहन मलिन भ' गेल।

उदास अछि घ'र बेटी विदा भेलय
आयलय पुतहु जे सुदिन भ' गेल।

अहाँ तंँ प्राण बन्हकी राखि अयलौं
आब जिनगी ओकर अधिन भ'गेल।

प्रेम पर्यंत जँ बसि जाए एकहि ठाम
बुझू बाँचब ओकर  कठिन भ' गेल।

घुरब कत्तहु सँ कहियो आएब घ'रे
कोनहुँ दिन भाग  ई दहिन भ' गेल।

धार बड़ तेज छै दुनियाक पानिक
नाचि क' समय ई नटिन भ' गेल।
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      गंगेश गुंजन। २८.०७.'२१

         #उचितवक्ताडेस्क।

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