उपजा आमद आ कविता

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        •उपजा आमद साहित्य•
    सुकुर अछि जे कविता-कथा
    नाटक- उपन्यासमे अर्थात
    साहित्य-लेखनक उपजा
    बढ़यबाक कोनो जैविक-
    रासायनिक खाध नहिं होइत
    छैक जेना फ़सिलक उपजा
    बढएबा वास्ते बजार मे विविध
    खाध सहजहिं उपलब्ध छैक
   अन्यथा साहित्यहु मे सबसिडीक
   प्रावधान करबाक राजनीति,
   केन्द्रीय बनि क' रहितैक। देश में
   दू-दू टा कवि प्रधान मंत्री भ'
   चुकल छथि। इतिहास आ
   परम्परा अछि।
      एम्हर कविता आ राजनेता मे
   हेम-छेम विशेष बढ़ल अछि से
   ध्यान गेलय ?
             #उचितवक्ताडेस्क।

                   गंगेश गुंजन

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