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'ललबबुआ'
'ललबबुआ शिष्टाचार-संस्कृति
आब नहिं चलत। नव विकसित
होइत समाजक तीख वर्गबोध आ
युगाकाँक्षाक संघर्षक आवेश मे
सभक लेल बूझब आवश्यक।
एही डेग पर परिवर्तनक दिशा
चीन्हि लेब सह अस्तित्व लेल
आवश्यक अछि।
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#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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