मनुष्याभास-कव्याभाष !

मनुष्यक समाज मे यदि मनुष्याभास भ' सकैत छथि तँ कविक समाज मे 'कव्याभास किएक नहिं भ' सकैत छथि ?
              #उचितवक्ताडेस्क।                 

                    गंगेश गुंजन।


टिप्पणियाँ