|| डेग-डेग पर रोकैए ||
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बात - बात मे टोकैए
डेग - डेग पर रोकैए।
कहिया कैल कोन उपकार
बेर - बेर जे घोषैए।
एक ठोप खसल जे सुख
दु:ख अभावक सोखैए।
ओ अपना मे अपने लय
भरि संसार के जोखैए।
गाछ वृक्ष माटिक नुकसान
ग'ड़ पर्यावरण मोकैए।
धह-धह वायु जराबय ई
देह ज़हर जल उसनैए।
कउखन विश्व-स्वास्थ्य नामे
कउखन देसक थोपैए।
केहन भेल इ मनुखक दिन
पक्षी आब परबोधैए ।
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गंगेश गुंजन
०७.१०.'२१.
#उचितवक्ताडेस्क।
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