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बाढ़ि मे डूमल रोपल धान
ठाम-ठीम ऊगल अछि प्राण।
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आएब-जाएब मे मूल्यवान
कय टा किछु छूटै छैक।
जीवन मे अपने जीवन किछु
बात सेहो लूटै छैक।
#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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