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ढीलम-ढालम कल-पुर्जाक इ
गाड़ी जीवन।
अकस्मात रुकि जाइत कतहु
सवारी जीवन।
कोनहुँ टा किछुओ निश्चित न
मार्ग एकर
पथ अनन्त संबलक तुच्छ
तैयारी जीवन।
असल कथा कविता प्रेमक
पोथी ने गीत
शोक,दुःख, झगड़ा घृणाक
अखबारी जीवन।
बैसल कोनो बटोहिक थाकल
तन्द्रा मे
बीच बाट थिक पोटरी के
बटमारी जीवन।
कम संँ कम भरि गामक छल
बेसी भरि विश्वक
आब एखन असकर सबहक
परिवारी जीवन।
राजनीति सँ ल' क' जीवन
धर्मक सब नऽव
दास भेल एकेक लोकक
दरबारी जीवन।
किछु निजता नहिं,ओ ममतो
नहिं जीवन मे रस
केहन भेल इ तंत्र समाज,
वेवहारी जीवन।
गंगेश गुंजन
२७.०५.'२१.
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