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नवका गाना
लिखब तंँ न'व लीखब।
बाजब तंँ न'व कहब।
दु:खो नहिं पुरना कलमक,
न’ब सुख केँ ताकब,से कहब
फूलो नै मौलाएल लीखब।
रहब तंँ न'व घर मे
जीयब तंँ न'व दुनिया
कांँट-कूस नबका चीन्हब
नवका बाट न'व बाढ़नि संँ
बहारब।
बनाएब नव गति,नब पयर-डेगे
जायब,चलब।
न’व विश्वास करब,गढ़ब
लोकक न'वे क अभ्यास
करब,र'हक बड़ जरूरी हो
जतय,टुटलो-भांगल जोड़बय
गामे घुरि आयब,बाध
लीखब,गाछ
पढ़ब,पानि बसात बनि
रहब-बहब।
🌿🌿
१६.८.’१९.
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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