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। प्रेम के बहुत जगह चाही ।
सोचियौ जे मात्र एक गोटेक प्रेम
धरै लय
एक टा ताजमहल ज़रूरी भ'
गेलैक। कतेक रास भूमि
खगता भेलैक ? जँ
भरि संसार लोकक प्रेम राख'
पड़ितैक तँ कत' रखितय ?
बुझाइए,
सृष्टि बुतें अपना जे राखल पार
नहि लगलैक से सभ टा
मनुष्येक हृदय मे धरैत गेलय।
मने सृष्टिक विकल्प थीक-
मनुष्यक हृदय !
🌿। । 🌿
#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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