🌳! !🌳
रस्ता मे जा रहल कनि देखैत
जेबनि हुनको
बाटे मे चलि गेलनिहें छोड़ि क'
अप्पन लोक।
थाकि क' बैसल ने होथि कतहु
कोनो गाछ तर।
एकरती बिलमि क' हुनको
बगलमे बैसि जेबनि।
🌳!
!🌳
#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें