राजकमल चौधरी जीक योगदान

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  राजकमल चौधरीजीक योगदान !
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  मैथिली साहित्य मे किछु अन्ये
  प्रारम्भ जकांँ देह-पीड़ा कें
  रोमान्टिकता प्रदान क' जाएबसेहो
  राजकमल चौधरीए जीक
  योगदान बनि गेल। कहीं आब ई
  नवका काव्यरूढ़ि ने बनि जाय  
  जे बिना ठेहुन-डाँड़ दर्दे कोय
  कवि बनिए ने सकैए।श्रेष्ठ कवि तँ
  कदापि नहि।
  राजकमल जीक देह-दण्ड तुच्छ
  आ साधारण नहिं छलनि। ओ
  'मुक्ति प्रसंग' सन काव्य कृतिक
  अपरिहार्य परणति बनल।
  आब यदि ठेहुन डाँड़ दर्द बिनु
  लेखक नहिं तँ (स्व.)प्रभास कुमार
  चौधरी आ सौभाग्य सँ विद्यमान
  गोविन्द बाबू लेखके नहिं आ ने
  भीमनाथ जी कवि।
                    ! 🙂 !
            #उचितवक्ताडेस्क।

                गंगेश गुंजन

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