ग़ज़ल नहिं : ग़ज़ल सन
ग़ज़ल ओ शे'रक रूप मे पजेबा
बनायब हमरा नहिं रुचैए। किन्तु
दोहे जकांँ काव्य-विधाक रूप
मे ग़ज़ल हमरा बड़ प्रिय लगैए।
तें हम 'ग़ज़लसन' लीखैत छी।
यदि कोनो ग़ज़ल भ' जाइत हो
तँ से हमर प्रयास सँ नहिं स्वयं
भ' जाइत हयत।
इति,
गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
२५.१२.'२१.
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