🌀 मन पुरुष !
माय-बाबू लग हम बेटा रहैत
छी।
शिक्षक लग रहैत छी विद्यार्थी।
गाम मे गौंआँ,टोल मे टोलबैया
रहैत छी।
देशक लोकतंत्र मे एक टा
जनता लोक रहैत छी
भोट देबा काल-मतदाता छी।
मीता लग हम मीत रहैत छी
मुद्दै लग मुद्दै।
दालान पर घरबैया रहैत छी।
आङ्गन मे जे व'र-कनियाँ से
घर मे ओछाओन पर कनियाँ
लग व'र नहिं,
पुरुख भ' जाइत छी।
कनियाँ स्त्री रहि जाइए
किएक ।
सृष्टिक कि,
ई सम्बन्ध-विधान
नव समाजशास्त्रक थिकै ?
कहिया सँ ?
गंगेश गुंजन,
#उचितवक्ताडेस्क।
२९दिसंबर,२०२१.
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