. 🍀 .
। १ ।
घर ककरो मगर ऐ मे रहि
रहल छै आओर कोइ
स्नेह तंँ बेघर क' हमरा बेस
कयलकय कमाल।
। २ ।
दोहराओल सब बात ओना
बसिये नहिं होइत छै
टटका बात लिखल नहि जा
सकइछ कोनहुँ बसिया मन सँ।
🍀
#उचितवक्ताडेस्क।
गंगेश गुंजन
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