🌼 लिखल-पढ़ल
[कवि राजकमल जी कें अर्पित]
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चेन्ह-संकेत समेत
लीखल-पढ़ल वस्तु सभक
दस्तावेज हमहूंँ अनमन,
राखि जाय चाहैत छी तहिना जेना
नैहर जाइत काल स्त्री,
पुरुष के बुझा क' जाइत छैक-
राखल सभ व्यवहार वस्तुक स्थान
कुंँजीक झाबा आ नीक जकाँ
रखै लय
अपना स्वास्थ्यक ध्यान।
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गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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