🌓
से मनुष्ये थीक जे
प्रेम मे पानि लिखलक तँ
भरि पृथ्वी ज'ल आ नदीक संग
समुद्र भ’ गेल
आकाश मे
मेघ !
🌧️
#उचितवक्ताडेस्क। गंगेश गुंजन
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