हिनका लय ने हुनका लय : ग़ज़ल सन

 🌿         ग़ज़ल सन           🌿
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     हिनका लय ने हुनका लय
     नहिं जानी जे किनका लय।

     गीत लिखी हम वा कविता
     अपना लय वा जनता लय।

     रौद तप्त घामे भीजल
     जऽनक सिर पर बरखा लय

     बेरोजगार भूखल वा
     कनइत विश्वक बच्चा लय।

     मुँह पर लागल जाबी कें
     खोलक कोशिश करबा लय

     टूटल फाटल कालहु मे
     देखय नबका सपना लय।

     चुप रहि कय सब सहबा लय
     उच्च स्वर मे कहबा लय।

     यश भरि अर्जित करबा लय
     वा ककरो ख़ुश रखबा लय।

      रह-ओ एहने दुनिया वा
     नवका दुनिया रचबा लय

     गुंजन जी ने बुझि सकला
     लीखै छथि ओ ककरा लय।
                  ।🌸।                                              गंगेश गुंजन 

            #उचितवक्ता।
             २५.०७.'२२.

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