ग़ज़ल सन
किछु तँ भेलैए ककरो
मन नहि लगैए हमरो।
एहन किएक सब फीका
उदासे लगैए सगरो।
किछु ने वा बहुते कम
ढेर भेलैए तकरो।
ओत' सुनै छी रौदी
कतौ पसरलय एम्हरो।
छोड़त ओहो बाटहि
भरोसे किए ओकरो।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
ग़ज़ल सन
किछु तँ भेलैए ककरो
मन नहि लगैए हमरो।
एहन किएक सब फीका
उदासे लगैए सगरो।
किछु ने वा बहुते कम
ढेर भेलैए तकरो।
ओत' सुनै छी रौदी
कतौ पसरलय एम्हरो।
छोड़त ओहो बाटहि
भरोसे किए ओकरो।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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