🌀। गोलैसी-गोलैसी ।🌀
पता लागल तँ आइ कतेक दिन
पर गेलौं जे नीक मंचक पैघ गोष्ठी
साहित्यिक जुटान हेतै। से विर्त
माधव भ' गेलौं। ओत' बैसल बेसी
गोटय तँ स्थानीय प्रतिद्वंदी संस्थाक
खिधाँस में व्यस्त आ मस्त रहथि।
मुदा हो दैव, हम अपना
साहित्यिक भरोस पर उल्लास
मे,उल्लास मे जहाँ कि ओत'
समकालीन साहित्य विषयक नव
नव पढ़ल-लीखल साहित्यक गप्प
करय लगलौं कि लोक सब
लुलुआब' लागल। अपन सन मुंँह
ल' क' घुरि अयलौं।
.
अभिनव विद्यापति
अजित आज़ाद जीक फेसबुक
पृष्ठ पर कवि उदयचन्द्र झा 'विनोद'
जीक सद्य: प्रकाशित पोथी 'हम
परिनाम निरासा'क शुभ समाचार
पढ़िते देरी : लगे मे बैसल एक टा
समकालीन समान्तर कवि अपन
भावोद्गार प्रगट करैत बजलाह :
'कय युग पर आबि क' ई बड़का
काज भेल। मैथिली मे अभिनव
विद्यापतिक बड़का अभाव छल
आब समाप्त भेलय। लेखक
प्रकाशक दुनू कें भरि पोख
साधुवाद।
.
मैथिलीक प्रेमचन्द आ
जयशंकर'प्रसाद'
प्रसिद्ध हिन्दी कथाकार प्रेमचन्द
जयन्तीक दौर मे एक ठाम
फेसबुक पर हिन्दीक महान लेखक
प्रेमचन्द तथा महान छायावादी
कवि जयशंकर प्रसादक बनारसक
एक संगे फोटो देखि क' मैथिलीक
एक युवक साहित्यकार उद्गार
प्रकट करैत बजलाह :
'बगाय-बानी सँ सेहो अनमन लगैए
जेना पैट घाट पर मैथिली
कथाकार शिवशंकर श्रीनिवास आ
कवि नारायण जी होइथ।'
मैथिलीक दुनू साहित्यिक भविष्य
कें शुभकामना।
*
फेसबुक पर लेखक मधुकान्त जी
लिखलथिन जे :
"मिथिला के आब कवि,कथाकार
उपन्यासकार,नाटककारे-टा
नहिं,चिंतक, विचारक चाही।
वर्तमाने नहिं भविष्यद्रष्टा महापुरुष
चाही।प्रगतिशीले नहिंप्रोन्नतिशील
साहित्य कार चाही।"
मधुकान्त जीक ई उद्गार पढ़िते
मातर एक टा अति जाग्रत मैथिली
सेनानी टिपलथिन : 'उचित। तखन
तँ एहि गुरु गंभीर भूमिकाक
निर्वाह करैत काल अपने स्वयं केँ
बड़ एकसरुआ अनुभव करैत
हयब ने मधू बाबू ?'
😀😋😝
नोट :
ई सभ टा साहित्य चर्चा हमर
परम मित्र श्रीसमाधान प्रसाद
जीक सद्भावना सौजन्य सँ प्राप्त
भेलय। समय-समय पर भेटल एहि
कतोक अओरो सनेस मे सँ किछु
कें बिलहि देब हमरो साहित्यिक
कर्तव्य तें, फेसबुक संगी-समाज
कें समर्पित!
जय हिन्द!
पन्द्रह अगस्त शुभकामना।
#उचितवक्ताडेस्क।
(फेसबुक पर १५.०८.'२२.प्रात: देब बिसरि गेल रहय।😝 तें आब।)
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