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एहनो जीवन जीवी से भीतर संँ
चाह रहत
नै बदलब तँ नै बदलत संसार
तबाह रहत।
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ट्रेन बदलि गेने कि बदलि
जाइतछि स्टेशन
पटरी संग सब आन व्यवस्था
वैह अधलाह रहत।
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आनक सुख सँ धाह लगत तँ
बूझि लीअ' जे
अपनहुंँ हर्षक दुनिया सब टा
खकसियाह रहत।
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आर कहत के ककरा लग छैक
समय एतेक
एकटा अछि दासे कबीर ई सब
दिन ठाढ़ रहत।
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सूती कोन करौटे अछि से तंँ बड़
दिव निज हाथ
मगर कोनो निर्णय एकसरुआ
सदा दोखाह रहत।
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सभ समाज केर तन मन अछि
रक्ताल्पताक रोगी
बिनु उपचार जड़ि सँ केने
स'ब रोगाह रहत।
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भाषा हो,संस्कृति,इतिहासक
गौरव जे हो
राज्य भेटि गेनहिं ऐ मे स'ब
सोहांँत रहत।
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बहुत रास जगमग नियनलाइटो
मे देखब तँ
एखनो जीवित छथि गुंजन जी
से अफ़वाह रहत।
•• गंगेश गुंजन
#उचितवक्ताडेस्क।
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