सब सूति रहल हम किए जगैत... ग़ज़ल सन

•                     ग़ज़लसन                    •

   सब सूति रहल हम किए जगैत रहि गेलौं
   से कोन भोर छल जे तकैत रहि गेलौं।

   सभ ठीक ठाक बाट पर सोझे   चलैत गेल
   आ हम को'न काँट-कूस बाट गहि लेलौं।

 देखलने कोनो आइ धरि बीचे मे कतहु ठाढ़
   हम सब बेर भ्रम मे बाटहि मे रहि गेलौं।

   चाहल तँ कतेक बेर सोर करियै ओकरे
   सब बेर मोन मारि क' एकसरे ढहि गेलौं।

बड़ राति क' पहुंँचल रही ओकर शहर में हम
घरक पता रहय ओकर नम्बर बिसरि गेलौं।

                  गंगेश गुंजन                                     #उचितवक्ताडेस्क।
                  ३१.०८.'२२.

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