🌸🌿 बांँचल सृष्टि
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नीक रहय एक लिफाफ उदासी,
ताहू संँ बेशी,
कय-कय राति बन्न यात्राक भरि
अंतर्देशीपत्र अनुरोध।
दौड़ल-हफसल तुरन्त अयलाक
बादहुँ ,
चानन संँ लीखय हमर भाल पर
ठोढ़क उचरल स्पर्श
बहुते रास सद्य:स्नात आखर !
ओकर बाद,
ओहि संँ नीक,
सृष्टि मे कहांँ किछु रहय।
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( फेसबुक पर संँ) गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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