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ओ सतबय हम सहैत जाइ ई कोन
निसाफ
भार उठाबी ह'म आ राजा ओ
कोन निसाफ।
ख़ूनी हाथ सहस्र मुंँड घूमय छुट्टा
भरि देस
शहर संँ ल' संसद धरि ओकरा
सभ टा माफ़।
बड़ बुधियारीसँ भ' रहलय निर्वस्त्र लोकतंत्र।भाग्यविधाता सबकिछु कइएक' रहता साफ़
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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