ई बात नहिं जे सबके पक्का मकान छै : गज़ल सन

ई बात नहिं जे सबके पक्का मकान छै
 शहरे जकाँ एतहु सब बड़के दोकान छै।
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 बड़ किछु अपन स्वरूप मे आएल महानगर
 गामो मे आबि गेल सब डिजिटल ज्ञान छै।
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बड़ लग-लग रहितहुंँ अछि सभ न सभक ल'ग
 नगरे जकाँ एतहु वैह अप्पन आ आन छै।
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 हँ तेज़ भ' गेलैए किछु अधिकार युद्ध आब
 बाँचल नहिं धनीक लय गरीबक सम्मान छै।
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 चलि रहलय एत्तहु आब तनातनी लड़ाइ 
 धनिकक गुमान छै तँ गरिबोक गुमान छै।
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नीको जरूर भेल अछि किछु जायजो लड़ाइ
 नवको महल के सोझाँ साबुत मचान छै।
                    •                                  परिवर्तनक मन-मिज़ाज और नव युगक प्रवाह 
चीन्है मे चुकि गेलौं तँ छूटल जहान छै।
               १४.१०.'२२.
          #उचितवक्ताडेस्क।                                     गंगेश गुंजन 

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