| 👣 |
जीवन कला कि कर्म ?
°
जीयै मे आब आसकति होइ-ए।
पहिने यैह जीयब एक टा दिव्य
कला लागय आब कोनो छुच्छ
काष्ठ कर्म बुझाइ-ए।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। २८.११.'२२.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें