ख़ुशी हमर बाढ़नि

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      ख़ुशी हमर बाढ़नि !

    बाढ़नि बना लेलौं हम
अपन सभ सुख कें।
हकन्न कनै छलय प्रसन्नता
ठाम-ठाम सजाओल राखल,घरक
ताख संँ ल' क' ड्राइंग रूमक
सुसज्जित प्रदर्शनीय रैक मे
सम्मान पुरस्कार सँ ल' नवका प्रेम
पत्रक नाना ख़ुशी !
   कय टा मे दीबाड़ लागल,
किछुक पॉलिश उतरि गेल
किछुक विवर्ण भ' गेल उत्कीर्ण
अक्षर आलेख।
   किछु पढ़बा योग नहिं रहि गेल
कतोक हेरायल प्राण-सन्दर्भक
व्यौरा,
   बीझ आ धूरा लागल प्रतीक चिह्न
सभक भेल छल मलिन,
सुख शिथिल वैभव !

   ख़ुशी कें हम बाढ़नि बना लेलौं।
  जीवनक सभ टा दु:ख,अप्रिय
झोल गर्दा आँगन दालानसँ बहारि
क' कात क' देबाक नित्यक
  औजार बना लेने छी।
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               गंगेश गुंजन                                        #उचितवक्ताडेस्क।                                  रचना:१९.११.'२२


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