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*| कसबट्टी |*
नीक कवि अहाँ कें पहिल बेर प्रेम सँ ई बोध करबैत छथि जे आइ धरि अहाँ एहन कविता नै पढ़ने रही।
नीक लेखक ई बुझबैत छथि जे अहांँ के कोन अनुभव नहिं भेल छल,एखन धरि की नहिं बूझल छल।
नीक आलोचक अहाँ कें एहि दुनू विषयक साहित्यक नक्शा बनबैत, अहाँ केंँ मैप रीडिंग जकाँ एकर रकवाक प्रकार,दिशा ज्ञान एवं फ़ोटो तरह सँ देखबैत छथि ओ तकर सम्भव सामाजिक आशय फरिछा क' बुझा दैत छथि।
जे लेखक-कवि-आलोचक अपन लेखन सँ उपर्युक्त ई समाज- संसार-सम्वेदी कार्य नहिं करैत छथि से वर्तमान भाषा मे थोड़ेक अओर निंहेस करैत छथि। खखरी ओसबै छथि।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क। ११.११.'२२
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