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आत्मदया सँ भरल कवि-लेखक
आत्मदया सँ भरल कोनो लेखक- कविक कोनो टिप्पणी वा तेहन लेख हमर लेखकीय स्वाभिमान कें आहत क' दैए।
आत्मदया सँ भरल कोनो भिखारि पर्यन्त हमरा देखल नै होइअय।
गंगेश गुंजन #उचितवक्ताडेस्क।
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