बीज लागल इच्छा सब...

                     👣                                           बीझ लागल इच्छा

टिनही बक्सा मे सब टा इच्छा
बहुत बर्ख सैंति क' राखल रहि
गेल।
कालान्तर में ब्रीफ केस राखक  सौभाग्य भेल तँ
टिनही बाकस मे रखलाहा सब  इच्छा कें पोछि क' नवका ब्रीफ  केस मे राख' लगलौं
आब हमर सभ टा स्थगित इच्छा
संगहि चल' लागल।
वित्त वर्ष,सत्र आ कैलेण्डर जकाँ
ऑफ़िसक ब्रीफ केस बदलैत रहल।

आब सम्पूर्ण अवकाश अछि तँ
अकस्मात मोन पड़ल अपन टिनही  बक्सा सँ ब्रीफकेस धरिक सिलसिला…
एक एक क' खोल' लगलौं,
मन लगा क' देख' लगलौं
पुरान धुरान किछु चिठ्ठी पत्री,
रहि गेल दफ़्तरी पत्रक कार्यालय  प्रति,
कतिपय तीत-मीठ उच्चाधिकारी
संग सहकर्मीक स्मृति !
स्थानांतरण सभक विदाइ कालक  फोटो
रेल,हवाइ जहाजक अधकट्टी टिकट
अंततः
अपन प्रथम ब्रीफकेस कें खोलल
जाहिमे सैंति क' रखने रही टिनही  बॉकसक टटका मनोरथ आ इच्छा  सब !
आहि रे बा !
देखैत छी जे सभ राखल रहि गेल  वा बिसरि गेल इच्छाक  प्रकृति,स्वभावक अनुसार कोनो  मुरुझल,
सुखा टटा क संदर्भ विस्मृत पड़ल  अछि,
कोनो मे दहिया फुफरी लागल,
कोनोक चानी सन चमकी  आभाहीन करिछौंह भ' गेल !
जे लोह सन रहल हयत ताहि सब  टा मे
निर्ममता सँ बीझ लागल !
सब अनचिन्हार!

स्तब्ध चित्त देखैत रहैत एहने मे ओ  पूछैत छथि- 'किछु चाही ?'
'नै:। कहाँ किछु चाही। एक रत्ती चाह बना देब?'
                          *
                   गंगेश गुंजन                                       #उचितवक्ताडेस्क।

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