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कविता लिखनहारक कवि-समूह मे किछु वास्तव मे कविओ होइत छथि। तहिना कथा लिखनहार सभ मे सब कथाकारे होइथ से
ज़रूरी नहिं।जेना आलोचना लिखनहार सब टा आलोचके नहिं होइत छथि।कौलेज मे पढ़ौनिहार प्रोफ़ेसर विद्वाने होइथ से आवश्यक नहि।अवश्ये किछु गोटय विद्वानों रहैत छथि।
सम्प्रति सिद्धाँत ई भेल।
#उचितवक्ताडेस्क। गंगेश गुंजन
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