ग़ज़लसन
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सब बात मे कोनो न' कोनो बात रहै छै
बाते मे बहुत बात सब आघात रहै छै।
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किछु बात बड़ सरल हो किछु हो बड़े जटिल
गँहिरो लगैत बात किछु बेबात रहै छै।
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बड़ यत्न सँ लगै छथि किछु लोक साधारण
लेकिन देखार होइतहिं अभिजात रहै छै।
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किछु राफो-साफ़ बात मे हित रहत मलिन
प्रेमहुँक स्वच्छ भाव किछु संघात रहै छै।
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बड़ दिव प्रशस्त अछि समाज मे कीर्तिक बात
तेँ लोकहु कुख्यात किछु विख्यात रहै छै।
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ककरो सब बाते बुझाएत रुनझुन बजैत
ककरो तँ शब्द शब्द जेना आघात रहै छै।
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मेंही बहुत लड़ाइ रहल धनिक गरीबक
ध'नेक शक्ति मे प्रबल अभिघात रहै छै।
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गंगेश गुंजन, #उचितवक्ताडेस्क। २१.दिसं.'२२.
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