ने भाषा छलय ने विचार अपन...

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     ने भाषा छलय ने विचार अपन
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  हमर अपन ने भाषा छलय ने
विचार छल
  अहाँ लोकनि बेरा बेरी मुँह मे   कोंचैत रहलौं भाषा आ दिमाग में विचार।
  यैह बुझू या यैह बाजू।
भरि जन्म हम बजैत अयलौं,सैह कहैत अयलौं।
  विद्या ओ अध्यवसाय तँ देलौं नहिं कहियो।
  से दै वास्ते तँ अपन-अपन लोक कें आधुनिक गुरुकुल-अमेरिका इंग्लैंडक
  ऑक्सफोर्ड-शिकागो पठबैत रहलौं।
  आब हम सैह धर्म बजै छी,जाति
  कहैत छी सम्प्रदाय,प्रदेश कि मातृभाषा तँ सभ गोटय के बड़ तीत लगैए।
क्रोध होइअय।
किएक ?
विश्व समुदाय मे निन्दा पारित होइअय।
क्षुद्र व्यवसाय एक्सपोर्ट मे बारल जयबाक भय होइअय। ओछाओल रहैत छी
कृपाकाँक्षी भेल विकसित देशक आगाँ।
तेँ ने।
भरि जन्म बौक,बहिर,आन्हर बना क' रखै गेलौं जन-जन कें।
क्यो इंगलैंड,क्यो अमेरिका,ओ क्यो रूसक
अनुदान, तथाकथित सांँस्कृतिक आदान प्रदान-पर अपन विद्या,ऊर्जा,लोक प्रेम,मेधा सब सम्भावना भोथ बना क'
कय टा नदी-धार संगे सुखा दै गेलौं।
पंँचबर्खी योजना के पथार दैत रहलौं,
अपन अपन भोट-बखारी भरैत रहलौं।
भरि जन्म बौक,बहिर,आन्हर बना क' रखै गेलौं जन जन कें।
हरवाह चरवाह बनौने रहि गेलौं।
                 २.
एतेक दशक बाद आब
लेब' चाहैत छी हमरे सँ हिसाब ?
अहाँ तँ कन्हाईयो मास्सैब कें मातु करैत छी।
भरि पेट माछ-भात खा' अघा क'
स्कूलक क्लास मे टेबुल पर मूड़ी पाड़ि 'फोंफ काटि क' सूतैत रहलौं।
आब कहैत छी हमरे भुस्कौल,अकर्मण्य,
   कर्तव्य हीन ?
                    ३.
   एखनो भाषा नहि द' रहल छी,
   एखनो विचार नहिं द रहल छी,
   एखनो मंच-मंच सँ अपना अपनी क'
   आपसी वैमनस्यक धहधह हकार
   द' रहल छी,अपनहि घरौआ नव आयोजनक पजरैत समाचार द' रहल छी।
अपन-अपन पाग-टोपी पहिरने,
मुरेठा बन्हने सभा क' रहल छी।
फोटो बिलहि रहल छी।
रुपैया गना क' कयल बेटा बियाहक समधिआओन सँ आयल कोजाग्रा भारक बयन जकाँ मनमाफिक वीडियो बना-बना,
बाँटि रहल छी,छेकने रहैत छी यूट्यूब सँ सौंसे मोबाईल ।
हमरा बूड़ि बुझै छी ?
                   ४.
ज्ञान कोनो स्कूल मे लिखाओल-अक्षरे मे कि रटाओल शब्द भरि सँ नहिं होइ छैक।
माटिक पानि,बसात,आगि-प्रकाश मे
कय काल मोलायम हरिअर घास टुंँगैत
बच्छा-बाछीक थुथुन देखैत,
बाध टहलबैत महिंसक पीठ पर भेटि जाइ छैक।
एतेक युग जीवि क' आब पढ़ि लेलिअऐ हमहूँ।
     बेकूफी नै करै जाउ।
जुनि बुझू आबो हमरा बकलेल !
अहाँ लोकनिक लोकतंत्री बैमानीक
आब हद भेल।
                    ५.
  सब कविता में एक टा नेना,
  एक टा जुआन आ
  एक टा प्रौढ़ बृद्ध रहैत छैक।
  क माने कृत्य,
  वि माने विधान
  ता माने तात्पर्य।
             ० 
      १३.१२.'२१.
            #उचितवक्ताडेस्क।

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