भाषा मातृभाषा

🌿        भाषा,मातृभाषा

छुच्छे मातृभाषाक प्रति छुच्छ
प्रेमक उच्छ्वास टा करैत रहला
पर कोनो भाषा नै जीवैत रहैत
छैक आ ने अगवे कविता-कथा
-नाटक आलोचना लीखि क'।
अपन मैथिलीओ नहि।
      विश्व-बजार ओ कॉरपोरेट
कालक दबाव मे मैथिली सेहो घोर
'चिंता-युग' मे छथि। वर्तमान
परिदृश्य मे तें,एक बेर फेर मैथिली
-चिंता मे कहल महाकवि यात्रीक
(नागार्जुन)अंदेशा पर काल
सापेक्ष विचार-विमर्श होएबाक
चाही।
     सैह हयत मातृभाषाक
क्रियाशील चेतना !
नवतुरिये आबथु आगू !
               शुभकामना!
                     🌻
            #उचितवक्ताडेस्क।                                    गंगेश गुंजन                                 फेसबुक पर पूर्व प्रेषित पोस्ट 

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